कलश स्थापना विधि (घटस्थापना – Step by Step)

कलश स्थापना

शारदीय नवरात्रि 2025 का प्रारंभ सोमवार, 22 सितम्बर 2025 से हो रहा है। इस दिन कलश स्थापना (घटस्थापना) की जाती है। इस महत्वपूर्ण त्योहार को ‘Sharadiya Navratri’ के नाम से भी जाना जाता है।

📿 घटस्थापना (कलश स्थापना) शुभ मुहूर्त – 22 सितम्बर 2025
• प्रातःकालीन मुहूर्त: सुबह 06:09 से 08:06 बजे तक
• मध्यान्ह मुहूर्त: दोपहर 11:49 से 12:38 बजे तक

👉 शास्त्रों के अनुसार, प्रातःकाल का मुहूर्त (06:09 – 08:06) सबसे उत्तम माना गया है।

❌ अशुभ समय
• राहुकाल (सुबह 07:30 से 09:00 लगभग) के दौरान स्थापना करना वर्जित माना जाता है।
• यमगण्ड और गुलिक काल से भी बचना चाहिए।

🌸 बहुत शुभ!
यहाँ मैं आपके लिए शारदीय नवरात्रि 2025 (22 सितम्बर) की कलश स्थापना विधि क्रमबद्ध रूप से संस्कृत मंत्रों सहित प्रस्तुत कर रहा हूँ।

📿 कलश स्थापना विधि (घटस्थापना – Step by Step)

१. प्रातःकाल स्नान व संकल्प
• सबसे पहले स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें।
• पूजा स्थान को गंगाजल से शुद्ध करें।
• पाट (चौकी) पर लाल वस्त्र बिछाएँ और उस पर माँ दुर्गा की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
• हाथ में जल लेकर संकल्प करें:

संस्कृत संकल्प मंत्र

मम सर्वपापक्षयपूर्वक श्रीजगदम्बाप्रीत्यर्थं
शारदीय नवरात्रोत्सवे घटस्थापनां करिष्ये।

२. कलश की तैयारी
• मिट्टी के पात्र (कलश) में स्वच्छ जल भरें।
• उसमें सुपारी, सिक्का, पंचरत्न (यदि हो), आम या अशोक के पाँच पत्ते डालें।
• नारियल को लाल वस्त्र/मोली से लपेटकर कलश के ऊपर रखें।
• कलश के पास जौ/गेहूँ/धान बोएँ।

कलश पूजन मंत्र

ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा।
यः स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यंतरः शुचिः॥

३. कलश स्थापना मंत्र

ॐ कलशस्य मुखे विष्णुः कण्ठे रुद्रः समाश्रितः।
मूलतो ब्रह्मा तस्य मध्ये मातृगणाः स्मृताः॥
कुक्षौ तु सागराः सर्वे सप्तद्वीपा वसुंधरा।
ऋग्वेदोऽथ यजुर्वेदः सामवेदोऽप्यथर्वणः॥
अंगेषु सर्वे देवाश्च कलशं तु समाश्रिताः।
सर्वे समुद्राः सरितः सप्तद्वीपा वसुंधरा॥
आगच्छन्तु सुराः सर्वे कलशं तु समाश्रिताः॥

४. देवी आवाहन
• कलश के समीप दीपक जलाएँ और धूप अर्पित करें।
• दुर्गा माँ का ध्यान करते हुए आवाहन करें:

आवाहन मंत्र

या देवी सर्वभूतेषु शक्ति-रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

५. दुर्गा पूजन
• लाल फूल, अक्षत, सिंदूर, वस्त्र अर्पित करें।
• पान, सुपारी, नारियल, फल अर्पित करें।
• शुद्ध घी का दीपक जलाएँ और आरती करें।

६. जौ बोना
• मिट्टी की थाली में जौ बोकर उसे जल से सींचें।
• यह प्रतीक है माता के आशीर्वाद से जीवन में हरियाली और समृद्धि आने का।

७. दुर्गा मंत्र जाप

नवदुर्गा मूल मंत्र

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे॥

८. आरती
• अंत में माँ दुर्गा की आरती करें।
• “जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी” या दिन विशेष की देवी की आरती गाएँ।

📿 इस प्रकार घटस्थापना पूर्ण होती है और प्रतिदिन 9 दिन तक माँ की पूजा, आरती और भोग अर्पण किया जाता है।

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