दिवाली पर माँ लक्ष्मी को प्रसन्न करने के उपाय (पौराणिक कथाओं सहित)

traditional figures in garden

दिवाली — दीपों का त्योहार, खुशियों का उत्सव और भक्ति का महापर्व। हर साल जब अमावस्या की रात को घर-घर दीप जलते हैं, तब यह सिर्फ अंधकार मिटाने की रस्म नहीं होती, बल्कि माँ लक्ष्मी का स्वागत करने का सबसे पवित्र अवसर होता है। मान्यता है कि इस रात माँ लक्ष्मी स्वयं पृथ्वी पर आती हैं और उन घरों में प्रवेश करती हैं जो स्वच्छ, उजले और भक्तिभाव से भरे हों।

लेकिन क्या आप जानते हैं कि दिवाली की शुरुआत सिर्फ दीपों और पटाखों से नहीं हुई थी? इसके पीछे कई पौराणिक घटनाएँ और कथाएँ जुड़ी हैं — जिनमें समुद्र मंथन, भगवान विष्णु का अवतार, और श्रीराम के अयोध्या लौटने की कथा सबसे प्रमुख हैं।

आइए जानते हैं कि इन कथाओं में कैसे दिवाली माँ लक्ष्मी और समृद्धि का प्रतीक बन गई।


🌸 समुद्र मंथन और माँ लक्ष्मी का प्राकट्य

बहुत प्राचीन काल में जब देवता और असुरों के बीच लगातार युद्ध होते थे, तब दोनों ही पक्ष थक चुके थे। भगवान विष्णु ने सलाह दी कि यदि समुद्र मंथन किया जाए, तो उसमें से अमृत सहित कई दिव्य रत्न प्राप्त होंगे जो संसार का संतुलन पुनः स्थापित करेंगे।

देवता और असुरों ने मिलकर मंदराचल पर्वत को मथनी और वासुकी नाग को रस्सी बनाया। जब समुद्र मंथन शुरू हुआ, तो उसमें से अनेक दिव्य वस्तुएँ निकलीं — चंद्रमा, कालकूट विष, धन्वंतरि, ऐरावत हाथी, अप्सराएँ, और अंत में प्रकट हुईं माँ लक्ष्मी

वह दिव्य रूप में, कमल के फूल पर आसीन थीं, हाथों में सोने का कलश और कमल धारण किए हुए। जैसे ही माँ लक्ष्मी प्रकट हुईं, पूरा ब्रह्मांड आलोकित हो उठा। सभी देवताओं ने उनका स्वागत किया, और उन्होंने स्वयं भगवान विष्णु को अपना पति चुना।

इस दिन को ही महालक्ष्मी जयन्ती कहा गया — और यही दिन आगे चलकर दिवाली के रूप में मनाया जाने लगा। इसलिए दिवाली पर जब दीपक जलाए जाते हैं, तो वह माँ लक्ष्मी के धरती पर अवतरण की याद दिलाते हैं।


🌕 श्रीराम के अयोध्या लौटने की कथा

त्रेतायुग में जब भगवान श्रीराम ने रावण का वध कर सीता माता को मुक्त कराया और 14 वर्ष का वनवास पूरा हुआ, तब वे लक्ष्मण और सीता के साथ अयोध्या लौटे।

अयोध्या वासियों ने उनके स्वागत में अपने घरों और गलियों को दीपों से जगमग कर दिया। अमावस्या की वह रात दिवाली कहलायी।

राम के आगमन का अर्थ था — सत्य की जीत और अधर्म का अंत। यही कारण है कि दिवाली केवल लक्ष्मी पूजन का दिन नहीं बल्कि धर्म, प्रेम और विजय का पर्व भी है। माँ लक्ष्मी जहाँ श्रीराम के साथ रहती हैं, वहाँ धर्म, धन और सौभाग्य तीनों फलते-फूलते हैं।


🌺 भगवान विष्णु और बलि राजा की कथा

एक और कथा के अनुसार, असुरराज बलि अत्यंत दानवीर और धर्मात्मा था। लेकिन उसकी शक्ति से देवता भयभीत हो गए। भगवान विष्णु ने वामन अवतार लिया — एक छोटे ब्राह्मण बालक के रूप में।

वामन ने बलि से तीन पग भूमि दान में मांगी। जब बलि ने सहर्ष सहमति दी, तब वामन ने अपना विराट रूप धारण कर लिया — एक पग में पृथ्वी, दूसरे में स्वर्ग नाप लिया, और तीसरे पग के लिए बलि ने अपना सिर झुका दिया।

भगवान विष्णु उसकी भक्ति और दानशीलता से प्रसन्न हुए और उसे पाताल लोक का स्वामी बना दिया। कहते हैं कि इस दिन देवी लक्ष्मी ने भी राजा बलि को आशीर्वाद दिया और उसे अपनी कृपा का पात्र बनाया। यह दिन भी दिवाली के रूप में मनाया जाने लगा।


🌼 लक्ष्मी और दरिद्रता की कथा

एक कथा यह भी है कि जब भगवान विष्णु ने देवी लक्ष्मी से कहा कि वे पृथ्वी पर जाकर सबके घरों में जाएँ और देखे कि कहाँ सबसे अधिक पवित्रता है। माँ लक्ष्मी पृथ्वी पर आईं, पर हर जगह उन्हें गंदगी, लालच और क्रोध दिखाई दिया।

वे निराश होकर लौटने लगीं, तभी उन्हें एक वृद्धा का छोटा सा झोपड़ा दिखा — जहाँ सफाई, दीपक की रोशनी और भगवान का भजन चल रहा था। वृद्धा ने सच्चे मन से लक्ष्मी का स्वागत किया।

माँ लक्ष्मी प्रसन्न होकर बोलीं — “जहाँ पवित्रता और भक्ति है, वहीं मैं वास करती हूँ।”
तब से दिवाली की रात स्वच्छता, दीपक और भक्ति का प्रतीक बन गई।


🌷 दिवाली पर माँ लक्ष्मी को प्रसन्न करने के उपाय

इन सभी कथाओं से एक बात स्पष्ट होती है — माँ लक्ष्मी उसी घर में आती हैं जहाँ साफ-सफाई, सत्य, प्रेम और दान का भाव होता है। इसलिए दिवाली पर कुछ विशेष कार्य करने चाहिए:

  1. घर की संपूर्ण सफाई करें — कोने-कोने की धूल और बेकार वस्तुएँ हटाएँ।
  2. दरवाजे पर रंगोली और दीप जलाएँ — लक्ष्मी के कदमों का प्रतीक हैं।
  3. लाल या पीले वस्त्र पहनकर पूजन करें।
  4. लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति साथ रखें, क्योंकि गणेश बुद्धि और शुभता के देवता हैं।
  5. कमल का फूल, हल्दी, और सिक्के चढ़ाएँ।
  6. “श्री सूक्तम्” और “लक्ष्मी अष्टोत्तर शतनामावली” का पाठ करें।
  7. गरीबों को दान दें, क्योंकि दान माँ लक्ष्मी को सबसे अधिक प्रिय है।

🌙 दिवाली की रात क्या न करें

  • झगड़ा, नकारात्मक बातें, या अपशब्द बिल्कुल न बोलें।
  • रात में झाड़ू न लगाएँ और कचरा बाहर न फेंकें।
  • अंधेरा न रखें — कम से कम एक दीपक रातभर जलता रहे।
  • शराब या मांसाहार से दूर रहें।
  • पैसों का लेन-देन न करें।

🌻 दिवाली का गूढ़ संदेश

दिवाली का वास्तविक अर्थ है — अपने भीतर के अंधकार को मिटाना। लक्ष्मी सिर्फ धन नहीं, बल्कि शुद्ध ऊर्जा का प्रतीक हैं।
जब हम अपने मन से लालच, ईर्ष्या और आलस्य हटाते हैं, तभी सच्ची लक्ष्मी आती हैं — जो शांति, प्रेम और संतोष के रूप में प्रकट होती है।

इसलिए, जब आप दिवाली की रात दीप जलाएँ, तो सिर्फ घर नहीं, दिल भी रोशन करें।


✨ निष्कर्ष

दिवाली वह क्षण है जब सम्पूर्ण सृष्टि रोशनी में नहाई होती है — और उस रोशनी में माँ लक्ष्मी के चरण पड़ते हैं।
अगर हम अपने घर को स्वच्छ रखें, अपने मन को निर्मल रखें और दूसरों के लिए प्रेमपूर्ण रहें, तो लक्ष्मी जी न केवल आएँगी, बल्कि स्थायी रूप से निवास करेंगी।

समुद्र मंथन से लेकर श्रीराम के अयोध्या लौटने तक, हर कथा यही सिखाती है — जहाँ प्रकाश है, वहीं लक्ष्मी हैं। जहाँ धर्म है, वहीं समृद्धि है।

इस दिवाली, अपने घर और हृदय दोनों को दीपों से सजाएँ, और माँ लक्ष्मी से प्रार्थना करें कि वे आपके जीवन में सदा सुख, शांति, धन और ज्ञान की वर्षा करती रहें।


🌼🌺 शुभ दीपावली 🌺🌼
माँ लक्ष्मी आपके जीवन को धन, सौभाग्य और आनंद से भर दें!

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